ऋणमोचन मंगल स्तोत्र

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र

मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रद:।

स्थिरामनो महाकाय: सर्वकर्मविरोधक:।।

लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां। कृपाकरं।

वैरात्मज: कुजौ भौमो भूतिदो भूमिनंदन:।।

धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।

कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम्।

अंगारको यमश्चैव सर्वरोगापहारक:।

वृष्टे: कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रद:।।

एतानि कुजनामानि नित्यं य: श्रद्धया पठेत्।

ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्रुयात् ।।

स्तोत्रमंगारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभि:।

न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्।।

अंगारको महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।

त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय:।।

ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यव:।

भयक्लेश मनस्तापा: नश्यन्तु मम सर्वदा।।

अतिवक्र दुराराध्य भोगमुक्तजितात्मन:।

तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

विरञ्चि शक्रादिविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।

तेन त्वं सर्वसत्वेन ग्रहराजो महाबल:।।

पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गत:।

ऋणदारिद्रयं दु:खेन शत्रुणां च भयात्तत:।।

एभिद्र्वादशभि: श्लोकैर्य: स्तौति च धरासुतम्।

महतीं श्रियमाप्रोति ह्यपरा धनदो युवा:।
।। इति श्रीस्कन्दपुराणे भार्गवप्रोक्त ऋणमोचन मंगलस्तोत्रम् ।।

One Comment

  1. vikram
    Posted नवम्बर 26, 2010 at 2:34 अपराह्न | Permalink

    hello, after long time, i received a mail from you, feeling great once again to be with you in your mission to spread our ancient religious mantras to awake the new generation..

    Sir, sorry to say, two small changes required – in the second line written sthiramano – it should be sthirasano

    and in the 4th line – instead of vairatmaj – it should be dharatmaj, dhara=prithvi..

    thank you,

    kind regards,

    Vikram.


One Trackback

  1. By ऋण-मुक्ति के उपाय | Vadicjagat.com on अगस्त 29, 2010 at 2:44 अपराह्न

    […] मुक्ति मिलती है। 4॰ कर्ज मुक्ति के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें एवं लिए हुए कर्ज की प्रथम […]

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